The Ultimate Guide To Reprogram Subconscious Mind




हजरत मूसा ने कहा, "अरे आभागे! तू धर्म-शील होने के बजाय काफिर हो गया है क्या? काफिरों जैसी बेकार की बातें कर रहा है। अपने मुंह में रुई ठूंस। तेरे कुफ्र की दुर्गंध सारे ससार में फैल रही है। तेरे धर्म-रूपी कमख्वाब में थेगली लगा दी। मोजे और कपड़े तुझे ही शोभा देते हैं। भला सूर्य को इन चीजों की क्या आवश्यकता है?

हजरत रसूल ने बीमार से कहा, "तू खुदा से दुआ कर कि वह तेरी कठिनाइयों को आसान करे। ऐ खुदा!

तुझको मालूम नहीं कि जिसदिन मैं पैदा हुआ था, अन्याय की जड़ उसी दिन खोद दी गयी थी। प्रकाश के सामने अंधेरा कब ठहर सकता है?"

हजरत लुकमान यद्यपि स्वयं गुलाम और गुलाम पिता के पुत्र थे, परन्तु उनका हृदय ईर्ष्या और लोभ से रहित था। उनका स्वामी भी प्रकट में तो मालिक था, परन्तु वास्तव में इनके गुणों के कारण दिल से इनका गुलाम हो गया था। वह इनको कभी का आजाद कर देता, पर लुकमान अपना भेद छिपाये रखना चाहते थे और इनका स्वामी इनकी इच्छा के विरुद्ध कोई काम नहीं करना चाहता था। उसे तो हजरत सुकमान से इतना प्रेम और श्रद्धा हो गयी थी कि जब नौकर उसके लिए खाना लाते तो वह तुरन्तु लुकमान के पास आदमी भेजता, ताकि हले वह खालें और उनका बचा हुआ वह खुद खाये। वह लुकमान का जूठा खकर खुश होता था और यहां तक नौबत पहुंच गयी थी कि जो खाना वह न खाते, उसे वह फेंक देता था और यदि खाता भी था तो बड़ी अरुचि के साथ।

उसने पूछा, "तुम अभी तो मुझप वार करना चाहते थे और अब तुरन्त ही तलवार फेंककर मुझे छोड़ दिया। इसका क्या कारण है!

तू कबतक झूठ बोलता रहेगा? तू बड़ा कपटी है।"

सब लोग साहस करके आगे बढ़े और बादशाह का अभिवादन किया। बादशाह ने पूछा, "तुमने चोरी की है?

जलालुद्दीन रूमी / चौधरी शिवनाथसिंह शांडिल्य (विकिपीडिया)

[जो मनुष्य केवल काम के प्रारम्भ को देखता है, वह अन्धा है। जो परिणाम को ध्यान में रक्खे, वह बुद्धिमान है। जो मनुष्य आगे होने वाली बात को पहले ही से सोच लेता है, उसे अन्त में लज्जित नहीं होना पड़ता।]१

[दया की तलवार सममुच लोहे की तलवार से श्रेष्ठ है।] १

से भाग कर और समाज के खिलाफ शादी कर लेती है

मिस्र-निवासी हजरत जुन्नून ईश्वर-प्रेम में विह्वल होकर पागलों-जैसे आचरण करने लगे। शासन-सूत्र गुण्डों के हाथ में था। उन्होंने जुन्नून को कैद में डाल दिया। जब दुष्ट मनुष्यों को अधिकार प्राप्त होता है तो मंसूर-जैसा सन्त भी सूली पर लटका दिया जाता है। जब अज्ञानियों का राज होता है तो वे नबियों तक को कत्ल करा देते read more हैं।

एक वैयाकरण नाव में सवार था। वह घमंड में भरकर मल्लाह से कहने लगा, "क्या तुमने व्याकरण पढ़ा है?"

मौलवी ने कहा, "तुझे निस्सन्देह मारने का अधिकार है। कोई कसर उठा न रखा। जो अपनों से अलग हो जाये, उसकी यही सजा है। इतना ही नहीं, बल्कि इससे भी सौगुना दण्ड मिलना चाहिए। मैं अपने निजी बचाव के लिए अपने साथियों से क्यों अलग हुआ?"

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